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जो कच्चा माँस खाते हैं, जो मनुष्यों द्वारा पकाया हुआ माँस खाते हैं, जो गर्भ रूप अंडों का सेवन करते हैं, उन के इस दुष्ट व्यसन का नाश करो !

अंत में, साईं भक्त सोचे की क्या किसी मस्जिद में इस मुस्लिम की मूर्ति लग सकती है??

ईद के दिन वे मुसलमानों को मसजिद में नमाज पढ़ने के लिये आमंत्रित किया करते थे । एक समय मुहर्रम के अवसर पर मुसलमानों ने मसजिद में ताजिये बनाने तथा कुछ दिन वहाँ रखकर फिर जुलूस बनाकर गाँव से निकालने का कार्यक्रम रचा । श्री साईबाबा ने केवल चार दिन ताजियों को वहाँ रखने दिया और बिना किसी राग-देष के पाँचवे दिन वहाँ से हटवा दिया ।

भगवान कृष्णा ने अपने जीवन मै पूतना , सक्तासुर, त्रनावार्त , केसी , अघासुर , वकासुर , धेनुक , कंश , सिसुपाल , दन्तवक्र , भोमसुर , आदि लाखो राक्षसों को मारकर प्रथ्वी के पाप को दूर किया साईं ने अपने जीवन मै कुछ किया ओह मई भूल गया किया तो था १ बार

वे स्वयं कुए से पानी खींचते और संध्या समय घड़ों को नीम वृक्ष के निचे रख देते । जैसे ही रखते तो घड़े फुट जाते, क्यू की घड़े कच्चे थे !

१९४४ – श्री न.व्.गुनाजी ने धाबोलकर साहब की पुस्तक के आधार पर उसी नाम से इंग्लिश में श्री साईं सत्चारिता लिखी और पूरी तरह से बाबा को हिन्दू सिद्ध कर दिया.

आपने रामायण व रामचरित मानस मई भगवन राम की लीलाओ के बारे मै सुना और पीडीए होगा अब थोड़ी साईं की लीला पर चलते है

न्यूज़ वाले तो भांड है पैसा दो काम कराओ !

इससे पूर्व शिर्डी साईं को गली का कुता भी नही जनता था :- आगे सिद्ध किया गया है !

अब कुछ भक्तों को श्री साईं बाबा के वचन याद आने लगे !

जिस प्रकार कबीर का जन्म एक हिन्दू परिवार में हुआ था और उनको पालन पोषण एक मुस्लमान जोड़े ने किया एवं उनके गुरु एक हिन्दू थे. साई के बारे में भी यही कहानी प्रचलित की गयी.

१९१२ – बाबा एक बार फिर बहुत बुरी तरह बीमार पड़ गए और बहुत कमजोर हो गए,इसका फायदा उठाकर बाबा के आसपास के लोगों ने हिन्दू गतिविधियाँ तेज कर दी बाबा भी विरोध करने की स्तिथि में नहीं थे, क्यूंकि ईस समय रात को 11 बार मंत्र लिखकर जो सोचोगे सुबह तक वशीकरण हो जाएगा तक बाबा की आमदनी लगभग ४००-५०० रुपये रोज की थी जिसे आज के दौर में कहा जाय तो लगभग ७-८ लाख रुपये रोज.

मेरे मतानुसार श्री कृष्ण जानते थे की कलियुग में मनुष्य मतिभ्रमित हो कर मुर्दों को पूजेंगे इसीलिए उन्होंने अर्जुन को ये उपदेश दिया अन्यथा गीता कहते समय वे युद्ध भूमि में थे और युद्ध भूमि में ऐसा उपदेश देने का क्या अभिप्राय ?

 जहाँ उसे दफ़न किया गया वो मंदिर था किस का ?

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